NDA के बाद अब RIMC में भी लड़कियों को मिली जगह

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि लड़कियों को न केवल राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में बल्कि राष्ट्रीय भारतीय सैन्य कॉलेज और देश के पांच राष्ट्रीय सैन्य स्कूलों में भी शामिल किया जाएगा।बता दें कि एनडीए की तरह आरआईएमसी और आरएमएस ऐसे संस्थान रहे हैं जहां पर केवल लड़कों को शामिल किया जाता रहा है और यह सशस्त बलों के लिए फीडर संस्थानों के रूप में कार्य करते हैं।बुधवार को अपना हलफनामा सौंपते हुए, केंद्र ने आवश्यक ढांचागत और तार्किक परिवर्तन लाने के बाद शैक्षणिक सत्र 2022-23 से आरआईएमसी और आरएमएस में लड़कियों को शामिल करने के अपने फैसले से अवगत कराया। देहरादून में आरआईएमसी के लिए, हलफनामे में बताया गया है कि 11.5 से 13 वर्ष की आयु के लोग अखिल भारतीय प्रतियोगी परीक्षा पास करने के बाद संस्थान में शामिल होते हैं।सरकार ने कहा कि वह जनवरी 2023 से हर छह महीने में 5 लड़कियों को शामिल करना शुरू कर देगी, इसके लिए लड़कियों को जून 2022 में प्रवेश परीक्षा देने की अनुमति दी जाएगी। केंद्र सरकार ने अपनी योजना के पहले चरण के बारे में बताते हुए कहा कि इसमें हर साल 20 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी। यह वृद्धि कुछ बुनियादी ढांचों पर भी असर डालेगी।सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि दूसरे चरण में आरआईएमसी की क्षमता बढ़ाकर कुल 350 की जाएगी, जिसमें 100 लड़कियां शामिल होंगी। लड़कियों को जून 2027 में जनवरी 2028 से शुरू होने वाले कार्यकाल के लिए आरआईएमसी में प्रवेश के लिए जून 2027 में निर्धारित प्रवेश परीक्षा में भाग लेने की अनुमति दी जाएगी … इस वृद्धि के लिए बड़े बुनियादी ढांचे के विस्तार और बढ़ी हुई संख्या के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की आवश्यकता होगी।सरकार ने आगे कहा कि बालिका कैडेटों के लिए उपयुक्त चिकित्सा मानकों और प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के अलावा, गोपनीयता, सुरक्षा प्रदान करने के लिए व्यवस्था में कई अन्य संशोधन और पुनर्गठन करने होंगे। हलफनामे में कहा गया है कि अधिकारियों का एक बोर्ड सभी प्रासंगिक मुद्दों की जांच कर रहा है ताकि लड़कियों के अनुकूल बुनियादी ढांचे को बदला जा सके।बता दें कि जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एम एम सुंदरेश की पीठ गुरुवार को सरकार के हलफनामे की जांच करेगी। वकील कैलाश उधवराव मोरे की याचिका पर सुनवाई करते हुए 22 सितंबर को, पीठ ने सरकार से आरआईएमसी और आरएमएस में लड़कियों को शामिल करने के मुद्दे पर अपना पक्ष रखने को कहा था। जिन्होंने इन प्रमुख संस्थानों में महिला कैडेटों को अनुमति नहीं देने में लैंगिक भेदभाव और पूर्वाग्रह का मुद्दा उठाया था।

News by Kriti kumari