जाने कैसे होता है बिहार में 20 हजार का बालू यूपी में सवा लाख का, शहर के हिसाब से कीतनी बढ़ती है कीमत

UP में तीन गुना बढ़ जाती ‘लाल बालू’ की कीमत

यह देखा जाता है कि धंधेबाजों को मोटी कमाई लाल बालू के काले खेल में हाथ लगती है। वहीं जरूरत सिर्फ इस बात की होती है कि बालू लदे ट्रकों को वह कहां तक पहुंचा पाते हैं। नासरीगंज (बिहार) से चले बालू की कीमत यूपी की सीमा में प्रवेश करते ही तीन गुना हो जाता है। वहीं अगर यह 262 किलो मीटर दूर गोरखपुर पहुंच गए तो कीमत सात गुना बढ़ जाती है। बालू से लदे ट्रकों को पार कराने के लिए हर थाना क्षेत्र और चेकपोस्ट के इर्द-गिर्द दिन-रात दलाल सक्रिय रहते हैं, दलालों की पहुंच इतनी सटीक और उची है कि प्रशासन की छापेमारी टीम के निकलते ही उन्हें इसकी जानकारी मिल जाती है और जो ट्रक जहां रहते हैं उन्हें वहीं रोक दिया जाता है।

ट्रकों को बढ़ाने में दलालों की होती है महत्वपूर्ण भूमिका

लाल बालू के इस खेल में सभी कुछ इन दलालों पर ही निर्भर करता है। बालू लदे ट्रकों को अपने थाना क्षेत्र से पार कराने से पहले यह लोग एक मोटा कमीशन लेते है जिसके बाद यूपी की सीमा में प्रवेश कराया जाता है। वहीं यूपी की सीमा में ट्रकों के प्रवेश करने के साथ ही उधर के दलाल सक्रिय हो जाते हैं और वहां भी यही सेटिंग चलाई जाती है। बालू लदे ट्रक सीमा के अंदर जितनी दूर तक जाते हैं, उनकी कीमत चक्रवृद्धि ब्याज की तरह बढ़ जाती है। अतः ट्रकों को आगे बढ़ाने में दलाल एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कमीशन लेने के साथ ही रास्ते में आने वाली हर बाधा के बारे में चालक को बताते हुए बचाव के लिए एक सही दिशा-निर्देश दिया जाता हैं। वहीं दलाल के कमीशन में उनके सरकारी सूत्रों की भी कुछ हिस्सेदारी रहती है, जिसकी पोल अक्सर खुल खुली है।

शहर के हिसाब से कीतनी बढ़ती है कीमत?

नासरीगंज (बिहार) से 18 से 20 हजार में एक ट्रक बालू से लोड होता है, वहीं देखा गया है कि यूपी की सीमा में प्रवेश करने के बाद गाजीपुर में एक ट्रक बालू की कीमत 50 से 55 हजार हो जाती है। यदि वहीं ट्रक गाजीपूर से मऊ तक पहुंच जाता है तो उसी बालू की कीमत 70 से 75 हजार तक भी हो जाती है। वहीं आजमगढ़ पहुंचने पर यह बालू 90 हजार से एक लाख और गोरखपुर पहुंचने के बाद नासरीगंज में 20 हजार में इसकी कीमत बढ़कर 1.20 लाख से लेकर 1.35 लाख तक के करीब पहुंच जाती है।

प्रशासन की नजर से ओझल

इन ओवरलोड भरे हुए ट्रकों को बिहार की सीमा से बाहर जाने से रोकने के लिए खनन विभाग के अनेक स्थानों पर चेक पोस्ट बने होते हैं, जहां पुलिस कर्मियों कि तैनाती होती है। वहीं दूसरी तरफ ऐसे वाहनों को रोकने के लिए जगह-जगह पर थाने भी मौजूद हैं, वहीं आधा दर्जन थानों को पार करने के बाद ही बालू के ट्रक सीमा से पार हो सकते हैं, पर गौर करने वाली बात यह है कि बावजूद इसके, इससे संबंधित थाना और खनन विभाग को महीने में ऐसे एक भी लोडेड ट्रक नहीं मिलते हैं। जब जिला प्रशासन द्वारा कारवाई ऑर छापेमारी की जाती है तो दर्जनों वाहन पकड़े जाते हैं, यह सब जानने के बाद भी प्रशासन इसपर कारवाही नहीं करती, जबकि यह एक बेहद जरूरी मुद्दा बन चुका है।