दिल्लीवालों के लिए ग्लोबल वार्मिंग बन रहा चुनौती, वैज्ञानिकों ने दी ये चेतावनी

जलवायु परिवर्तन की समस्या से पूरा विश्व परेशान है. दुनिया के सामने ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन अब अहम मुद्दा बनता जा रहा है. स्थानीय स्तर पर भी जलवायु परिवर्तन खासा प्रभावी है. दिल्ली एनसीआर में सभी मौसम तेजी के साथ बदलते हैं. फिर चाहे गर्मी हो या सर्दी हो या फिर बरसात

गर्मी लगातार ज्यादा लंबी होती जा रही है तो वहीं सर्दी और बारिश भी हर साल नया रिकार्ड बना रही है. ग्लोबल वार्मिंग की वजह से दिन में ही अधिक गर्मी रहती है. आने वाले सालों में रात को भी बढ़ेगी. इसका मुख्य कारण ये है कि दिल्ली एनसीआर में शहरीकरण तेजी से हो रहा है. लिहाजा सूर्य की गर्मी रात को भी ऊपर की तरफ नहीं जा पाती है. कंकरीट और निर्माण की वजह से गर्मी धरती में ही ट्रैप रह जाती है. ऐसे में दिल्ली एनसीआर की सतह का तापमान उतना कम नहीं हो पा रहा जितना होना चाहिए.

दिल्ली की भौगोलिक स्थिति से पता चलता है कि यह हीट वेव बेल्ट में है. दिल्ली से हीट बेल्ट पाकिस्तान, राजस्थान से होते हुए गुजरात और आंध्र प्रदेश तक जाती है. जिसके चलते इसका असर भी दिखाई देता है. वहीं देश के दूसरे शहरों में भी रात के वक्त बढ़ता तापमान चिंता का सबब बना हुआ है. हीट वेव के साथ एक समस्या ये भी है कि इनमें नमी को सोखने की क्षमता बहुत अधिक और लंबे समय तक रहती है.

जलवायु परिवर्तन की वजह से साइक्लोन का खतरा भी बढ़ता है. इसका ताजा उदाहरण पिछले साल मई के महीने में गुजरात के तट से टकराया तूफान है. इस ताउते तूफान का असर नेपाल तक देखने को मिला था. उस वक्त ताउते तूफान के कारण दिल्ली में 16 घंटे से अधिक बारिश हुई थी.