भोजपुरी गीतों की आड़ में परोसा जा रहा अश्लीलता

आज हम बात करेंगे भोजपुरी फिल्म के और भोजपुरी फिल्म के अश्लील गाना की । बता दे की आज के समय में भोजपुरी में जिस तरह की गाना बनाई जाती है, वह अपने भाई, अपनी बहन या अपने परिवार के सदस्यों के साथ बैठे कर नही देखी जा सकती है। भोजपुरी। भोजपुरी एक ऐसा भाषा है, जिसे पहचान कि जरूरत नही है। भारत के सभी स्थान पे भोजपुरी का अपना अलग महत्व है। और यह भाषा सभी जगह अपना अलग परचम लहरा रहा है। बता दे की एक तरफ जहां भोजपुरी भाषा को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्धि दिलाने की कोशिश की जा रही, तो वही दूसरी ओर भोजपुरी के गीतकार, फिल्मकार और कलाकारों के द्वारा भोजपुरी को तहस महस करने की पूरी जोरों से कोशिश की जा रही। जीसे देखकर बहुत ही बुरा लगता है कि आखिर भोजपुरी भाषा के साथ ये क्या हो रहा? भोजपुरी के कलाकर, गीतकार और फिल्मकार के द्वारा ही भोजपुरी भाषा को तार- तार किया जा रहा है। आज हम अपने दर्शकों से पूछना चाहते है , कि क्या यही हमारे भोजपुरी का संस्कार है? क्या इसी भोजपुरी के लिये बिहारी ठाकुर ने मेहनत किया था। आज भी भोजपुरी में ऐसे लोग मौजूद है जो भोजपुरी को बढ़ाने का काम कर रहे। आज भी भरत शर्मा व्यास का गाना समाज जोरने का परिचय देता है साथ ही सारदा सिन्हा जैसे भी एक से एक विभुती मौजूद है जो भोजपुरी को बचाने की कोशिश कर रहे। पिछले 10-15 सालों में भोजपुरी के असलिल गानों कि सूची बन गयी है। इन अश्लील गाना गाने वाले लोगों को तो शर्म आनी ही चाहिए। पर क्या आपने कभी सोचा है कि ये अस्लिल गानें आखिर सुनता कौन है? आखिर इन गानों की TRP कैसे बढ़ती, इसके वियुवरस कैसे बढ़ते? मै आपको बता दु कि इन कलाकार लोगों के साथ साथ हम जैसे श्रोता भी उतने ही दोषी है, क्योंकी हम भी इनके साथ मिलकर इन भोजपुरी अश्लील गानों के आर में समाज के बीच बलात्कार , दुष्कर्म जैसी चीजों को परोस रहे है। इस भोजपुरी भाषा के कारण ही हमारा न सिर्फ भारत देश में बल्कि मोरिसस् में भी भोजपुरी भाषा का एक वर्चस्व है। और साथ ही वहा के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री भोजपुरी बोलने वाले है। तो क्या हमारा फर्ज नही बनता कि हम सब एक साथ मिलकर, एक जुट होकर , ऐसा महौल बनाये कि भोजपुरी भाषा कि अश्लीलता पे विराम लगाया जा सके । आप एक बार खुद सोचिये कि गाना गाने के लिये एक सोच होना चाहिये एक कांसेप्ट होना चाहिए कि आखिर गाना का क्या संदेश है और वह लोगों तक क्या पहुँचाना चाहता है। अब आप सोचिये की लोग लहंगा में एसी, लहंगा में कूलर,लहंगा में मीटर लगा रहे । इन लोगों का यह गाना सुन कर बिजली विभाग जरूर खुश होगा, की चलो इसी बहाने कम से कम एसी, मीटर और कूलर लग रहा जिससे आने वाले समय में बिजली बिल भी देना होगा। लेकिन इन्हे कोई बताये कि लहंगा में एसी, मीटर और कूलर नही लगता। और हम ऐसे ही गानों को लाइक , कमेन्ट , और शेयर कर के इनको और आगे बढ़ा रहे। और एक यही कारण है की भोजपुरी के बड़े – बड़े कलाकर को आज के नये कलाकारों के द्वारा दबाया जा रहा और ये सभी अपनी मर्यादा से बाहर हो चुके है। इसलिए सरकार को इस पर रोक लगानी चाहिए की आखिर इस प्रकार का गाना किसके लिये गाया जा रहा। आप मनोज तिवारी को जरूर जानते होंगे, जो की दिल्ली के सांसद और दिल्ली के अद्यक्ष भी रह चुके है। उनका एक गाना था ‘ रिंकी के पापा तनी प्यार कर द ‘ । इस गाना की वजह से बीजेपी को दिल्ली में सरकार बनाने के लिये एड़ी चोटी का बल लगाना परा था और अंत में वहा केजरीवाल की ही सरकार बनी। और फिर बाद में यही गाना बहुत वायरल भी हुआ, जो की बहुत अश्लील गाना नही है । क्योंकि यहाँ के गानों में लोग लहंगा में एसी , लहंगा में मीटर और पता नही क्या क्या लगा रहे । आखिर भोजपुरी कलाकर इस गाने के माध्यम से कहना क्या चाहते है। क्या हम भोजपुरी के यही संस्कार है? हमारे संस्कार को भोजपुरी के कलाकर लोग और गीतकार लोग नये तरीके से हमारे सामने रखते है, और इन गानों कि ऐसी वीडियो बनाई जाती, जिसे देख कर ऐसा लगता है की हम कोई पॉर्न वीडियो देख रहे हो। और साथ ही इन कलाकारों के द्वारा ऐसे शब्दों का चयन किया जाता है जो भोजपुरी को शर्मशार कर दे। हम भोजपुरी श्रोताओं को सोचना चाहिये , बिहार के जनता को सोचना चाहिए , बल्कि केवल बिहार के जनता को नही पूरे देश की जनता को सोचना चाहिये , और एक बार जरूर प्रयास करना चाहिये कि ऐसे गायकों को सबक सिखाया जाये। क्योंकि जिस तरह ये लोग भोजपुरी को लोगों के सामने रख रहे, इससे न केवल भोजपुरी की बल्कि बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, उन सब जगहों की बदनामी हो रही है , जहाँ भोजपुरी भाषा का उपयोग किया जाता । साथ ही वैसे कलाकर जो अच्छे है, उनके उपर भी उंगली उठाई जा रही। इससे हमे बचना चाहिये, और सिर्फ बचना नही, बचाना भी चाहिए । और अगर हम अपने भोजपुरी को नही बचा पाते तो इसके जिम्मेवार केवल कलाकर नही बल्कि हम भी है, और ये हमे समझना होगा। हमें फिर से भोजपुरी को उस दौर में ले जाना होगा जब फिल्में लगती थी ‘ नदियाँ के पार ‘। हमें पूरी कोशिश करनी होगी। साथ ही मै उन भोजपुरी कलाकर से भी विनती करती हु की अब आप सभी अश्लीलता को फैलाना बन्द करे। क्योंकि अगर बिहार जगता है तो अच्छे अच्छे लोगों का भूत भागता है।

News by Pragya Kumari