जायडस कैडिला ने इमरजेंसी यूज के लिए मांगी मंजूरी, अब 12 साल से अधिक उम्र के बच्चों को भी लगेगा कोरोना टीका

कोरोना महामारी की तीसरी लहर से खुद को बचाव करने के लिए पहले सरकार और आम आदमी के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी है| और वह खुशखबरी यह है कि अब भारत देश में अब 12 साल से अधिक उम्र के बच्चों को भी कोरोना रोधी टीका लगाया जा सकेगा | इसके लिए स्वदेशी कंपनी जायडस कैडिला ने गुरुवार को अपनी कोरोना वैक्सीन जायकोव-डी के इमरजेंसी यूज के लिए भारत के औषधि महानियंत्रक डीसीजीआई से मंजूरी मांगी है | कंपनी का कहना है कि कंपनी ने भारत में अब तक 50 से अधिक केंद्रों में अपनी कोरोना वैक्सीन के लिए क्लीनिकल ट्रायल कर चुकी है | कंपनी ने डीसीजीआई के सामने वैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल का डेटा भी प्रस्तुत किया है, जिसमें लगभग 28,000 से अधिक वॉलंटियरों ने भाग लिया था| मीडिया से मिली सुचना के अनुसार अंतरिम डेटा में वैक्सीन सुरक्षा और प्रभावकारिता के मानकों पर खड़ी उतरी है | जायडस कैडिला ने डीजीसीआई के सामने डीएनए वैक्सीन जायकोव-डी के इमरजेंसी यूज के लिए सामने पेश आवेदन किया और मंजुरी मांगी | . जायडस कैडिला की यह वैक्सीन 12 वर्ष की आयु और उससे ऊपर के लोगों को लगाई जा सकती है | जायडस कैडिला ने जारी एक बयान में कहा कि कंपनी ने जायकोव-डी के लिए डीसीजीआई के कार्यालय में ईयूए के लिए आवेदन किया है | उन्होंने यह भी कहा कि कोरोना के खिलाफ एक प्लास्मिड डीएनए वैक्सीन है| यह जाहिर सी बात है कि सीरम इंस्टीट्यूट को सरकार ने बड़ा झटका दिया होगा | बच्चों पर किये जाने वाले वैकसीन ट्रायल करने के लिए केंद्रीय दवा प्राधिकरण की विशेषज्ञ समिति ने अनुमति नहीं दी | केंद्रीय दवा प्राधिकरण की विशेषज्ञ समिति ने बुधवार को सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को 2-17 आयु वर्ग के बच्चों पर कोविड-19 टीके ‘कोवावैक्स’ के दूसरे या तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल करने के खिलाफ सिफारिश की है| इस संबंध में सीरम इंस्टीट्यूट ने सोमवार को भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) को आवेदन करके 10 जगहों पर 920 बच्चों पर इस टीके के ट्रायल की इजाजत मांगी गई थी | जब इस आवेदन पर विशेषज्ञों और उनकी टीमों ने विचार-विमर्श किया तो पाया कि इस वैक्सीन को किसी भी देश ने अब तक इजाजत नहीं दी है और इसमें प्रकार की कई कमियां मौजूद हैं | हैदराबाद के मुख्यालय मे बनाई जाने वाली वैक्सीन वाली कंपनी को 2 से 18 साल की उम्र के लोगों में इसके टीके, कोवैक्सिन का परीक्षण करने की अनुमति दी जा चुकी है | यदि परीक्षण सफल होते हैं, तो यह वैक्सीन को अधिक व्यापक आबादी को कवर करने की अनुमति देगा | 80 प्रतिशत कवरेज रणनीति के अनुसार, सरकार को इस समूह को प्रभावी ढंग से बचाने के लिए 104 मिलियन बच्चों को कवर करने के लिए पर्याप्त टीकों की योजना बनानी होगी | इसलिए, इस प्रैक्टिस के लिए दो-खुराक वाले टीके की कम से कम 208 मिलियन खुराक की आवश्यकता होगी| तीन-खुराक वाले टीके के मामले में, टीकों की आवश्यकता बहुत अधिक होगी|

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Pragya Kumari