गांव की सरकार चुनने के लिए चुनाव आयोग ने शुरू की तैयारी

कोरोना के लेकर जहां आम जनजीवन अस्त व्यस्त रहा वहीं निजी और सरकारी कामकाज भी ठप रहे, इन्हीं कारणों की वजह से बिहार पंचायत चुनाव भी समय पर नहीं हो सका। कोरोना और ईवीएम पर उठे विवाद के वजह से गांव के लोग नई सरकार चुनने से वंचित रह गए। ईवीएम विवाद जब ठंडा पड़ा तो भारतीय चुनाव आयोग और राज्य चुनाव आयोग ने चुनाव की तैयारी शुरू की तो कोरोना की दूसरी लहर ने फिर से सबकुछ रोक दिया, अब जब करोना की लहर कम हो गई है तो चुनाव आयोग ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी है।पंचायत चुनाव को लेकर अड़चने खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है, करोना कि लहर शांत हुई तो सूबे में मॉनसून ने दस्तक दे दि है। बताया जा रहा है कि चुनाव आयोग ने आपदा प्रबंधन से बाढ़ प्रभावित जिलों की सूची मांगी है, इन जिलों के लोगों का विशेष ध्यान रखा जाएगा ताकि वे चुनाव से वंचित न रह जाए। भारतीय वैज्ञानिकों के अनुसार करोना कि तीसरी लहर के आने की संभावना भी जताई जा रही है, अगर यह तीसरी लहर नहीं आती है तो आयोग दिसंबर तक चुनाव प्रक्रिया संपन्न करने की तैयारी कर सकता है।पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल कुछ महीने पहले ही समाप्त हो गया परंतु कोरोना की वजह से चुनाव नहीं हो सका इसलिए बिहार सरकार ने परामर्शी समिति का गठन किया जो फिलहाल अभी गांव की सरकार चला रही है। गठित समिति का भी कार्यकाल नवंबर में समाप्त हो जाएगा इसे देखते हुए चुनाव प्रक्रिया को दिसंबर तक पूरा करने की योजना बनाई जा रही है।बता दें कि पिछला पंचायत चुनाव 2016 मैं ही हुआ था जिसका कार्यकाल कुछ महीने पहले ही समाप्त हो गया, परंतु कोरोना की वजह से संभावित समय पर चुनाव नहीं हो सका। ईवीएम को लेकर विवाद भी चुनाव नहीं होने का एक मुख्य कारण रहा, जिसमें अदालत को भी हस्तक्षेप करना पड़ा।बता दें कि इन सभी बाधाओं को धीरे-धीरे समाप्त किया जा रहा है और उम्मीद लगाई जा रही है कि दिसंबर तक पंचायत चुनाव को पूरा कर लिया जाएगा।

News by Manish kumar