ओबीसी छात्रों के लिए आरक्षण

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एएस बोपन्ना की सर्वोच्च न्यायालय बेंच ने शुक्रवार को एक नया फैसला पिछड़े वर्ग और आर्थिक रूप से लोगों के हक में लेकर देश को एक मोर लाकर खड़ा कर दिया है।

आपको बता दे की सुप्रीम कोर्ट ने अन्य पीछे वर्ग के लोगों के लिए एक नया फैसला लिया है। साथ ही इकोनॉमिकली वीकर सेक्शन (ई डबल्यू एस) को भी अब लाभ मिलेगा ।

मेडिकल स्ट्रीम में पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण को एक बड़ा बढ़ावा देते हुए सरकार ने एक बड़ी राहत के रूप में, सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को अखिल भारतीय कोटा सीटों के तहत एमबीबीएस और एमडी पाठ्यक्रमों में 27% ओबीसी कोटा पर अपनी मंजूरी की मुहर लगा दी और केंद्र को भी अनुमति दी। यह फैसला शैक्षणिक वर्ष 2021-22 के लिए लिया गया है। साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए अतिरिक्त 10% सीटें आरक्षित कर दी गई है।

महत्वपूर्ण रूप से निर्णय, विस्तृत कारण जो समय की कमी के कारण न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और एएस बोपन्ना की पीठ द्वारा नहीं लिखे जा सके, एनईईटी-यूजी (एमबीबीएस पाठ्यक्रम) और 50 के तहत 15% एआईक्यू सीटों के लिए काउंसलिंग फिर से शुरू करने का रास्ता होगा। शैक्षणिक वर्ष 2021-22 के लिए नीट-पीजी (एमडी) के तहत एआईक्यू सीटें जो 25 अक्टूबर से ठप हैं।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आई एम ए) के अध्यक्ष, फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (एफ ओ आर डी ए) और कई डॉक्टरों ने अपने विचार व्यक्त करने के लिए अपने सोशल मीडिया अकाउंट का सहारा लिया। जबकि कुछ घोषणाओं से खुश थे और प्रवेश प्रक्रिया शुरू करना चाहते थे, कई अन्य ने 7 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के फैसले को “ब्लैक डे” करार दिया।

आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष, डॉ जेए जयलाल ने कहा: “हम पीजी काउंसलिंग को मंजूरी देने के लिए एससी को धन्यवाद देते हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इसके लिए युवा डॉक्टरों को सड़कों पर 4 महीने तक जोर-जोर से प्रयास करना पड़ा और पुलिस की बर्बरता का शिकार होना पड़ा। आशा है कि मंत्रालय प्रवेश प्रक्रिया में तेजी लाएगा और दो सप्ताह में कक्षाएं शुरू करने में सक्षम होगा।”

हालांकि हम ऐसा अनुमान लगा रहें हैं की इस निर्णय से पिछड़े वर्ग अथवा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्र छात्राओं के लिए अब नीट की पढ़ाई करने की प्रेरणा मिलेगी।

Aashka Swaraj